अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका को 2026 G20 का न्योता रद्द किया, सफेद किसानों पर हमलों को बताया कारण

(जीवन दिशा न्यूज़)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि दक्षिण अफ्रीका को अगले साल (2026) अमेरिका में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित नहीं किया जाएगा। ट्रंप ने इसका कारण दक्षिण अफ्रीका में कथित तौर पर “सफेद किसानों (मुख्य रूप से डच, फ्रेंच और जर्मन वंशज अफ्रीकानरों) के खिलाफ हो रहे भयानक मानवाधिकार उल्लंघन और हत्याएं” बताया।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लंबे पोस्ट में लिखा,

“संयुक्त राज्य अमेरिका ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका में हुए G20 सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया क्योंकि दक्षिण अफ्रीकी सरकार अफ्रीकानरों और अन्य यूरोपीय वंशजों के खिलाफ हो रही भयावह मानवाधिकार हिंसा को नजरअंदाज कर रही है। सीधे शब्दों में कहें तो वहां सफेद लोगों की हत्या हो रही है और उनकी जमीन-जायदाद छीनी जा रही है। सबसे दुखद बात यह है कि न्यूयॉर्क टाइम्स और बाकी फेक न्यूज मीडिया इस नरसंहार (जेनोसाइड) पर चुप हैं। यही कारण है कि रैडिकल लेफ्ट के सारे झूठे मीडिया घराने बंद हो रहे हैं।”

राष्ट्रपति ने आगे कहा कि G20 सम्मेलन के समापन समारोह में दक्षिण अफ्रीकी प्रतिनिधियों ने G20 अध्यक्षता अमेरिकी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने से इनकार कर दिया था। इसके जवाब में ट्रंप ने घोषणा की:

  दक्षिण अफ्रीका को 2026 में मियामी (फ्लोरिडा) में होने वाले G20 सम्मेलन में आमंत्रित नहीं किया जाएगा।

  दक्षिण अफ्रीका को दी जाने वाली सभी अमेरिकी आर्थिक सहायता और सब्सिडी तत्काल प्रभाव से बंद कर दी जाएंगी।

  ट्रंप ने दक्षिण अफ्रीका को “दुनिया के किसी भी मंच पर सदस्यता के लायक देश नहीं” करार दिया।

दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने अभी तक इस घोषणा पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा की सरकार पहले भी “सफेद किसानों के खिलाफ व्यवस्थित नरसंहार” के दावों को खारिज करती रही है और इन्हें “अति दक्षिणपंथी प्रोपेगैंडा” बताती रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका में किसानों (सफेद व काले दोनों) की हत्या की दर ऊंची है, लेकिन इसे नस्लीय नरसंहार नहीं माना जाता।

अमेरिका-दक्षिण अफ्रीका संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं, खासकर भूमि सुधार कानून और दक्षिण अफ्रीका के रूस-यूक्रेन युद्ध में तटस्थ रुख को लेकर। ट्रंप का यह कदम दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों को और गहरा झटका दे सकता है।

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