(जीवन दिशा न्यूज़)
• पहला: जो अपना फल टहनियों में देते हैं, जैसे- आम, अमरुद, केला इत्यादि।
• दूसरा: जो अपना फल जड़ में जमीन के नीचे छिपाकर देते हैं हैं, जैसे- आलू, अदरक, प्याज इत्यादि।
जो वृक्ष अपने फल टहनियों में देते हैं, उन वृक्षों को सभी खाद-पानी देकर सुरक्षित रखते हैं, और ऐसे वृक्ष फिर से फल देने के लिए तैयार हो जाते हैं।
किन्तु जो वृक्ष / पौधें अपना फल जमीन में जड़ के साथ छिपाकर रखते है, वे जड़ सहित खोद लिए जाते हैं, उनका भविष्य ही खत्म हो जाता हैं।
ठीक इसी प्रकार…
जो व्यक्ति अपनी विद्या, धन, शक्ति स्वयं ही समाज सेवा में समाज के उत्थान में लगा देते हैं, उनका सभी ध्यान रखते हैं और वे मान-सम्मान पाते है।
वही दूसरी ओर
जो अपनी विद्या,धन,शक्ति स्वार्थवश छिपाकर रखते हैं,किसी की सहायता से मुख मोड़े रखते है,वे जड़ सहित खोद लिए जाते है,अर्थात् समय रहते ही भुला दिये जाते हैं..!!
• || जीवन के दो पक्ष || •
इस संपूर्ण प्रकृति में विसर्जन के साथ ही सृजन भी जुड़ा हुआ है। हमारे दुखों का एक प्रमुख कारण यह भी है कि हम केवल जीवन के एक पक्ष को ही देखते हैं। हम जीवन को सूर्यास्त की दृष्टि से तो देखते हैं पर सूर्योदय की दृष्टि से नहीं देख पाते। पतझड़ होता है तो तभी वृक्षों पर हरी कोंपलें फूटती हैं और वह पुष्पित व फलित होता है।
परमात्मा से शिकायत मत किया करो क्योंकि वो हमसे बेहतर इस बात को जानते हैं कि हमारे लिए क्या अच्छा हो सकता है। उस ईश्वर ने आपकी झोली खाली की है तो चिंता मत करना क्योंकि शायद वह पहले से कुछ बेहतर उसमें डालना चाहते हों। इस प्रकृति में वृक्षों पर पतझड़ होता है ताकि हरियाली छा सके एवं अंधकार होता है ताकि अरूणोदय की लालिमा का आनंद हम सबको प्राप्त हो सके।
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