(जीवन दिशा) – अक्सर हमें यह सुनने को मिलता है कि वेंटीलेटर पर जाने वाले मरीज ठीक नहीं होते या अस्पताल सिर्फ पैसा लूटने के लिए मरीज को वेंटीलेटर पर रखते हैं। लेकिन क्या यह सच है? आज हम आपको वेंटीलेटर की सच्चाई बताएंगे।
वेंटीलेटर क्या है?
वेंटीलेटर एक चिकित्सा उपकरण है जो मरीज को साँस लेने में मदद करता है जब उनके फेफड़े किसी बीमारी या चोट के कारण ठीक से काम नहीं कर पाते। यह एक कृत्रिम फेफड़ा है जो मरीज को ऑक्सीजन देता है और कार्बन डाइऑक्साइड को निकालता है।
वेंटीलेटर पर रखने के कारण:
1. मरीज के फेफड़े की चोट या बीमारी के कारण साँस नहीं ले पाना।
2. मरीज की स्थिति खराब होने का डर।
3. मस्तिष्क में चोट के कारण मरीज को बेहोश रखने की आवश्यकता।
वेंटीलेटर का काम: वेंटीलेटर मरीज को साँस देता है ताकि उन्हें पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिले। इसमें कई मोड होते हैं जो मरीज की स्थिति के अनुसार बदले जा सकते हैं।
वेंटीलेटर से हटाना: जब मरीज की साँस लेने की क्षमता ठीक होती है, तो वेंटीलेटर से हटाया जाता है।
संशय क्यों? वेंटीलेटर पर रखे जाने वाले मरीज की स्थिति गंभीर रहती है और वे बेहोश रहते हैं। इसीलिए जानकारी के अभाव में लोगों में यह संशय रहता है कि उन्हें धोखे में रखा जा रहा है।
निष्कर्ष: वेंटीलेटर सिर्फ पैसा बनाने की मशीन नहीं है। यह एक जीवन रक्षक उपकरण है जो मरीज को साँस लेने में मदद करता है। अगर आपके किसी परिचित को वेंटीलेटर पर रखने की आवश्यकता है, तो डॉक्टर की सलाह पर अमल करें और संशय से बचें।

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