
(जीवन दिशा न्यूज़): दिल्ली पुलिस की साइबर पुलिस स्टेशन ने एक बड़े संगठित साइबर फ्रॉड सिंडिकेट को ध्वस्त कर दिया है। यह कार्रवाई ऑपरेशन साइ-हॉक के अंतर्गत की गई, जिसका उद्देश्य देशभर में चल रहे साइबर अपराधों के वित्तीय नेटवर्क को तोड़ना है।
पुलिस ने जांच में पाया कि इस सिंडिकेट ने करीब 20 फर्जी शेल कंपनियां (shell companies) और म्यूल बैंक खाते (mule bank accounts) बनाए थे। इनके जरिए पूरे भारत में की गई साइबर ठगी की रकम को लेयर-दर-लेयर तरीके से ट्रांसफर और साफ किया जाता था। राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों के विश्लेषण से यह मामला सामने आया। जांच में 176 साइबर फ्रॉड शिकायतें जुड़ी पाई गईं, जिनमें कुल ठगी की राशि लगभग 180 करोड़ रुपये बताई गई है।
दिल्ली पुलिस के डीसीपी न्यू दिल्ली के अनुसार, इस ऑपरेशन का मकसद सिर्फ छोटे-मोटे ठगों को पकड़ना नहीं, बल्कि साइबर अपराध के पीछे की बड़ी मनी लॉन्ड्रिंग और फंड ट्रांसफर की व्यवस्था को जड़ से खत्म करना है। जांच के दौरान महत्वपूर्ण डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए हैं, जिनमें मोबाइल फोन और लैपटॉप शामिल हैं।
दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं, जो इस नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि एक व्यक्ति को फ्रंटमैन (नाममात्र का डायरेक्टर) बनाकर कंपनियां और खाते खुलवाए गए थे, जबकि असली नियंत्रण अन्य लोगों के हाथ में था। आगे की जांच इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) और साइबरदोस्त के साथ समन्वय में चल रही है, ताकि अंतरराज्यीय और अन्य राज्यों से जुड़े बड़े लिंक का पता लगाया जा सके।
दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि साइबर फ्रॉड की कोई भी शिकायत तुरंत 1930 पर या NCRP पोर्टल पर दर्ज करें। ऐसे मामलों में सतर्कता और त्वरित रिपोर्टिंग से ही बड़े नेटवर्क को पकड़ा जा सकता है।
यह सफलता साइबर अपराध के खिलाफ दिल्ली पुलिस की मजबूत कार्रवाई का एक और उदाहरण है। जांच जारी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
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