
(जीवन दिशा न्यूज़) फिटनेस की दुनिया में अक्सर लोग क्रंचेस और सिट-अप्स को कोर स्ट्रेंथ का सबसे अच्छा तरीका मानते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि असली कोर स्ट्रेंथ फ्लेक्शन (झुकने) से नहीं, बल्कि एंटी-एक्सटेंशन (रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने की क्षमता) से आती है। हाल ही में एक पोस्ट में फिटनेस एक्सपर्ट ने एब व्हील रोलआउट व्यायाम को असली कोर बिल्डर बताया है, जो न सिर्फ दिखने वाले सिक्स-पैक बनाता है, बल्कि रीढ़ की हड्डी को मजबूत और सुरक्षित रखता है।
कोर स्ट्रेंथ क्या है? फ्लेक्शन नहीं, एंटी-एक्सटेंशन!
क्रंचेस और सिट-अप्स से कोर की सतही मांसपेशियां तो मजबूत होती हैं, लेकिन गहरी कोर मांसपेशियां (डीप कोर स्टेबलाइजर्स) जो रीढ़ को लोड के दौरान कंट्रोल करती हैं, वे कमजोर रह जाती हैं। असली कोर स्ट्रेंथ एंटी-एक्सटेंशन में है – यानी रीढ़ को आगे झुकने से रोकना और उसकी सुरक्षा करना।
एब रोलआउट व्यायाम के फायदे:
• गहरी कोर मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
• लंबे लीवर कंट्रोल सिखाता है।
• स्क्वाट्स, डेडलिफ्ट्स और ओवरहेड लिफ्ट्स में बेहतर फोर्स ट्रांसफर करता है।
सही तरीका अपनाएं: ब्रेस फर्स्ट, कंट्रोल द रेंज
इस व्यायाम में सबसे महत्वपूर्ण है सही फॉर्म – पहले ब्रेसिंग (पेट को टाइट करना), रेंज को कंट्रोल करना, और कोई सैगिंग (कमर झुकना) या ईगो लिफ्टिंग नहीं। मजबूत एब्स सिर्फ दिखने के लिए नहीं, बल्कि रीढ़ की सुरक्षा के लिए होते हैं।
वैज्ञानिक प्रमाण
यह दावे खाली नहीं हैं। कई रिसर्च स्टडीज एब रोलआउट जैसे व्यायामों की तारीफ करती हैं:
• कोर स्टेबिलिटी और एंटी-एक्सटेंशन मैकेनिक्स चोटों से बचाव में मदद करते हैं।
• रोलआउट टाइप व्यायामों में कोर मसल्स की हाई एक्टिवेशन होती है।
• डीप कोर फंक्शन इंजरी रेसिस्टेंस बढ़ाता है।
ये बातें पबमेड पर उपलब्ध स्टडीज से सिद्ध हैं, जो बताती हैं कि ऐसे व्यायाम रीढ़ की स्थिरता और मसल एक्टिवेशन को बेहतर बनाते हैं।
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