(जीवन दिशा न्यूज़) : जिम में घंटों पसीना बहाने वाले ज्यादातर लिफ्टर्स और बॉडीबिल्डर्स यह सोचते हैं कि ट्रेनिंग में मेहनत ही सब कुछ है, लेकिन वैज्ञानिक रिसर्च एक कड़वी सच्चाई सामने ला रही है—शराब (अल्कोहल) आपकी रिकवरी और मसल्स ग्रोथ को चुपचाप नुकसान पहुंचाती है। यह सिर्फ “धीमा रिकवर” नहीं करती, बल्कि सीधे उन सेलुलर प्रोसेस को प्रभावित करती है जो ट्रेनिंग के स्ट्रेस को मसल्स की ग्रोथ में बदलते हैं।
रिसर्च बताती है कि एथेनॉल (शराब का मुख्य कंपोनेंट) लीवर में पहले मेटाबॉलाइज होता है, जिससे शरीर का रेडॉक्स स्टेट बदल जाता है। इससे mTOR (mammalian target of rapamycin) एक्टिविटी दब जाती है—यह वह महत्वपूर्ण सेलुलर मशीनरी है जो प्रोटीन सिंथेसिस को बढ़ाकर मसल्स को बड़ा और मजबूत बनाती है। साथ ही, शराब हार्मोनल बैलेंस बिगाड़ती है: कॉर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) बढ़ता है और टेस्टोस्टेरोन (एनाबॉलिक हार्मोन) कम होता है। ये बदलाव मसल्स में कैटाबोलिक (टूटने वाला) माहौल बनाते हैं।
एक महत्वपूर्ण स्टडी (PLOS ONE और अन्य रिव्यू) में पाया गया कि वर्कआउट के बाद भारी मात्रा में शराब पीने से मसल प्रोटीन सिंथेसिस (MPS) 24-37% तक कम हो जाता है—यह तब भी होता है जब प्रोटीन के साथ शराब ली जाए। यानी आप कितना भी प्रोटीन खाएं, शराब उसकी एफिशिएंसी को कम कर देती है।
यह प्रभाव इतना ड्रामैटिक नहीं होता कि तुरंत महसूस हो, इसलिए ज्यादातर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लंबे समय में यह आपकी मेहनत का रिटर्न कम कर देता है—आप ग्रो करते हैं, लेकिन उतनी तेजी से नहीं जितनी बिना शराब के हो सकती थी।
वॉल्यूम, इंटेंसिटी और प्रोटीन इनटेक पर आपका रिटर्न कम हो जाता है। सवाल यह नहीं कि शराब “गेन्स मार देती है” या नहीं—सवाल है कि क्या आप एक ऐसी आदत के लिए तैयार हैं जो बायोलॉजिकल रूप से आपकी एडाप्टेशन पर टैक्स लगाती है, बिना यह चेक किए कि यह आदत आपके लिए कितनी जरूरी है?
एक्सपर्ट्स की सलाह: अगर आप सीरियस गेन्स चाहते हैं, तो ट्रेनिंग के आसपास (खासकर पोस्ट-वर्कआउट) शराब से परहेज करें। मॉडरेट पीना (कम मात्रा, कभी-कभार) कम नुकसान करता है, लेकिन रेगुलर या भारी ड्रिंकिंग आपकी प्रोग्रेस को काफी पीछे धकेल सकती है।
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