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मसल पंप: बड़ा पंप जरूरी नहीं मतलब बेहतर वर्कआउट, विज्ञान ने खोला राज

(जीवन दिशा न्यूज़)। जिम में ट्रेनिंग करते समय कई लोग मसल पंप (muscle pump) को अपनी मेहनत की सबसे बड़ी निशानी मानते हैं। लेकिन एक नई रिसर्च बताती है कि बड़ा पंप होना जरूरी नहीं कि बेहतर या ज्यादा प्रभावी वर्कआउट का संकेत हो।

स्टडीज के अनुसार, वर्कआउट के दौरान कितना काम आप करते हैं, उसका मसल पंप की साइज से कोई स्पष्ट संबंध नहीं है। पंप असल में एक अस्थायी (temporary) प्रतिक्रिया है जो कुछ मिनटों में चरम पर पहुंचती है और आमतौर पर 15 से 30 मिनट के अंदर सामान्य हो जाती है।

पंप क्यों होता है?

वर्कआउट के दौरान मसल्स को ज्यादा ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। इससे ब्लड फ्लो बढ़ जाता है (हाइपरमिया)। साथ ही, मसल कंट्रैक्शन के दौरान बनने वाले बायप्रोडक्ट्स दबाव बढ़ाते हैं, जो मसल में फ्लूइड खींच लाते हैं। नतीजा — मसल फूल जाता है, यानी पंप आता है।

लेकिन ध्यान दें:

यह सूजन (swelling) स्थायी नहीं होती। असली मसल ग्रोथ (hypertrophy) धीरे-धीरे हफ्तों और महीनों में होती है, जब मसल की संरचना में बदलाव आता है।

हर किसी को पंप नहीं आता

रिसर्च यह भी बताती है कि कुछ लोगों को बहुत तेज पंप महसूस होता है, तो कुछ को बिल्कुल नहीं। एक ही मसल ग्रुप में भी अलग-अलग लोगों में सूजन अलग-अलग जगहों पर दिख सकती है।

निष्कर्ष:

अगर आपके वर्कआउट में पंप नहीं आ रहा है, तो निराश होने की जरूरत नहीं। पंप को अपने प्रोग्रेस का एकमात्र पैमाना न बनाएं। फोकस करें सही फॉर्म, लगातार प्रोग्रेसिव ओवरलोड और रिकवरी पर। असली नतीजे समय के साथ दिखते हैं।

सोर्स:

PMIDs: 41973210, 41276164

फिटनेस प्रेमियों के लिए टिप:

अगली बार जब कोई आपसे पूछे — “भाई पंप आया?” — तो मुस्कुराते हुए कह दें, “पंप तो आया, लेकिन असली ग्रोथ तो अभी बाकी है!”

अपनी ट्रेनिंग को स्मार्ट बनाएं, सिर्फ पंप के पीछे न भागें। 💪

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