(जीवन दिशा न्यूज़): हमारे माता-पिता और दादा-दादी हर रोज थोड़ा कमजोर, धीमे और नाजुक होते जा रहे हैं। उन्हें देखकर मदद न कर पाने का दर्द बहुत गहरा होता है। लेकिन अब अच्छी खबर है—उम्र बढ़ना समस्या नहीं है, बल्कि सारकोपेनिया (उम्र से जुड़ी मांसपेशी हानि) असली वजह है। और इसे रोका जा सकता है!
भारत में हाल ही में जेरियाट्रिक सोसाइटी ऑफ इंडिया ने देश की पहली राष्ट्रीय गाइडलाइंस जारी की हैं—“Indian Guidelines for the Evaluation and Management of Sarcopenia”। ये गाइडलाइंस बताती हैं कि 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों में प्राइमरी सारकोपेनिया की समस्या बहुत आम है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, भारत में 60+ उम्र के लोगों में इसकी दर 39.2% से 43.6% तक पहुंच चुकी है—यानी हर 10 में से 4 व्यक्ति प्रभावित।
हाल के रिसर्च (जैसे Longitudinal Aging Study in India और अन्य क्रॉस-सेक्शनल स्टडीज) से पता चला है:
• ग्रामीण इलाकों में यह समस्या शहरी क्षेत्रों से ज्यादा (14.8% बनाम 6.8%)।
• पुरुषों में महिलाओं से अधिक प्रभावित।
• कुल मिलाकर 43.6% बुजुर्गों में सारकोपेनिया और 19.4% में गंभीर रूप।
यह सिर्फ कमजोरी नहीं लाती—गिरने, हड्डी टूटने, मौत का खतरा बढ़ना, कैंसर या ICU में खराब रिकवरी जैसी गंभीर समस्याएं पैदा करती है। बैठे-बैठे जीवनशैली (sedentary lifestyle) और खराब पोषण से यह और तेजी से बढ़ती है। कई मामलों में सारकोपेनिक मोटापा (मांसपेशी कम, फैट ज्यादा) भी होता है, जो दोहरी परेशानी देता है।
नई गाइडलाइंस में जांच के आसान तरीके डॉक्टर अब इन टेस्ट से जल्दी पता लगा सकते हैं:
• हैंडग्रिप स्ट्रेंथ (हाथ की पकड़): पुरुष <27.5 kg, महिला <18 kg
• चलने की गति ≤0.8 m/s
• 5 बार कुर्सी से उठ-बैठना ≥12 सेकंड
• पिंडली की परिधि पुरुष ≤34 cm, महिला ≤33 cm
स्क्रीनिंग के लिए SARC-F जैसे सरल सवालों का इस्तेमाल भी सुझाया गया है।
रोकथाम और इलाज बहुत आसान गाइडलाइंस सलाह देती हैं—कम से कम 3 महीने तक:
• रेजिस्टेंस एक्सरसाइज (स्ट्रेंथ ट्रेनिंग): वेट लिफ्टिंग, स्क्वाट्स, पुश-अप्स आदि, हफ्ते में 2-3 बार।
• प्रोटीन युक्त पोषण: रोजाना बॉडी वेट के 1-1.2 ग्राम प्रति किलो प्रोटीन (दालें, पनीर, दूध, अंडे, सोया, चिकन/मछली)।
• विटामिन D की कमी दूर करें, HMB जैसे सप्लीमेंट्स अगर जरूरी।
एक्सपर्ट्स कहते हैं: “स्ट्रेंथ से सम्मान बचता है। जल्दी पता चलने से स्वतंत्रता बनी रहती है।” भारत में बढ़ती बुजुर्ग आबादी के साथ यह एक बड़ा पब्लिक हेल्थ चैलेंज है, लेकिन सही कदम से लाखों लोग मजबूत और स्वतंत्र रह सकते हैं।
अगर आपके घर में बुजुर्ग हैं, तो आज ही डॉक्टर से बात करें और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग + प्रोटीन डाइट शुरू करें। उम्र बढ़ेगी, लेकिन कमजोरी नहीं!
(स्रोत: Geriatric Society of India Guidelines 2026, Indian Consensus on Sarcopenia 2025, LASI Study, और हालिया रिसर्च जैसे PMID 40165836 आदि)
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