(जीवन दिशा न्यूज़): कई महिलाएं बचपन से सुनती आ रही हैं कि पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द (मासिक धर्म की ऐंठन या क्रैंप्स) बस सहना पड़ता है। लेकिन हाल के वर्षों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अध्ययनों ने बताया है कि यह दर्द हमेशा “सहना” जरूरी नहीं। शरीर की साधारण जरूरतों को पूरा करके इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है।
एक हालिया पोस्ट और कई वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, मैग्नीशियम (Magnesium) पीरियड क्रैंप्स में अहम भूमिका निभाता है। मैग्नीशियम मांसपेशियों को रिलैक्स करने और नर्वस सिस्टम को सपोर्ट करने में मदद करता है, खासकर गर्भाशय की मांसपेशियों को। जब शरीर में मैग्नीशियम की कमी होती है, तो क्रैंप्स ज्यादा तीव्र और शरीर ज्यादा टेंस महसूस हो सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक और कई रिसर्च पेपर्स (जैसे 2017 की लिटरेचर रिव्यू “Magnesium in the gynecological practice”) के अनुसार, मैग्नीशियम सप्लीमेंटेशन डिसमेनोरिया (पीरियड पेन) को रोकने या कम करने में प्रभावी हो सकता है। छोटे-छोटे अध्ययनों में पाया गया कि 150-300 मिलीग्राम मैग्नीशियम लेने से क्रैंप्स की तीव्रता कम हुई। मैग्नीशियम प्रोस्टाग्लैंडिंस (दर्द पैदा करने वाले केमिकल्स) के स्तर को कम करके गर्भाशय की मांसपेशियों को रिलैक्स करता है।
इसके अलावा, विटामिन B6 और पोटैशियम भी महत्वपूर्ण हैं। ये हार्मोन बैलेंस, मांसपेशी रिलैक्सेशन और ओवरऑल वेलबीइंग को सपोर्ट करते हैं। विटामिन B6 के साथ मैग्नीशियम लेने से PMS (प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम) के लक्षण और भी बेहतर तरीके से कम होते हैं, जैसा कि 2010 के एक अध्ययन में देखा गया।
प्राकृतिक रूप से इन पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है केला (Banana)। केले में मैग्नीशियम, पोटैशियम और विटामिन B6 प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं, जो पीरियड्स के दौरान मांसपेशियों को रिलैक्स करने और दर्द कम करने में मदद कर सकते हैं।
योग के दर्शन में भी यही बात सिखाई जाती है कि वेलबीइंग जबरदस्ती करने से नहीं, बल्कि शरीर की सुनकर, सपोर्ट करके और धीरे-धीरे उसके साथ काम करके मिलती है। छोटी-छोटी रोजाना आदतें, जैसे सही पोषण लेना, समय के साथ बड़ा फर्क ला सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर पीरियड पेन बहुत ज्यादा है, तो डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि कभी-कभी यह एंडोमेट्रियोसिस जैसी स्थिति का संकेत भी हो सकता है। लेकिन सामान्य क्रैंप्स के लिए मैग्नीशियम-रिच फूड्स या सप्लीमेंट्स आजमाना एक सरल और सुरक्षित तरीका हो सकता है।
(नोट: कोई भी सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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