(जीवन दिशा न्यूज़) आजकल लोग सुबह उठते ही सबसे पहले नाश्ता करने लगते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत हमेशा फायदेमंद नहीं होती? ज्यादातर लोग भूख की वजह से नहीं, बल्कि समाज या आदत के कारण सुबह-सुबह खाना खा लेते हैं। हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पहला भोजन थोड़ा देर से करना (यानी ब्रेकफास्ट डिले करना) शरीर के लिए कई फायदे दे सकता है। इसे इंटरमिटेंट फास्टिंग या नियंत्रित उपवास कहा जाता है, जो भूखा रहना नहीं बल्कि खाने का समय सही करना है।
वैज्ञानिक रूप से देखें तो जब आप रात के खाने के बाद सुबह का नाश्ता कुछ घंटे देर से करते हैं (जैसे 12-16 घंटे का फास्टिंग विंडो), तो शरीर में कई सकारात्मक बदलाव आते हैं:
• इंसुलिन लेवल कम रहता है: इससे शरीर स्टोर किया हुआ फैट आसानी से इस्तेमाल कर पाता है।
• कीटोन्स का स्तर बढ़ता है: फैट ब्रेकडाउन से बने कीटोन्स ब्रेन के लिए क्लीनर और बेहतर ईंधन बनते हैं, जिससे दिमाग ज्यादा तेज चलता है।
• ऑटोफैजी एक्टिवेट होती है: यह शरीर की सेल्स का क्लीनिंग प्रोसेस है, जिसमें डैमेज्ड पार्ट्स रिसाइकल हो जाते हैं। इससे सेल्स हेल्दी रहती हैं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है।
• ग्रोथ हॉर्मोन बढ़ता है: यह मसल्स को प्रोटेक्ट करता है और फैट बर्निंग में मदद करता है।
ये बदलाव भूख से नहीं, बल्कि शरीर की नेचुरल बायोलॉजी को स्पेस देकर होते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारती है, फैट लॉस बढ़ाती है, इन्फ्लेमेशन कम करती है और मेटाबॉलिक हेल्थ बेहतर बनाती है। हालांकि, ऑटोफैजी जैसे गहरे फायदे आमतौर पर 16-24 घंटे या उससे ज्यादा फास्टिंग में ज्यादा नजर आते हैं, लेकिन रोजाना ब्रेकफास्ट डिले करने से भी शुरुआती लाभ मिलते हैं।
यह स्टार्वेशन नहीं है – आप दिन में पर्याप्त प्रोटीन, न्यूट्रिएंट्स और ट्रेनिंग लेते रहते हैं। बस सुबह उठते ही खाना बंद कर शरीर को “कांस्टेंट इनपुट” देने से रोकते हैं। शरीर को स्पेस मिलता है तो वह बेहतर तरीके से काम करता है।
हालांकि, हर किसी के लिए यह तरीका सही नहीं होता। डॉक्टरों की सलाह लें, खासकर अगर आपको डायबिटीज, थायरॉइड या कोई मेडिकल कंडीशन है। कुछ स्टडीज में कैलोरी रिडक्शन ही मुख्य फायदा दिखता है, न कि सिर्फ टाइमिंग। फिर भी, कई लोग इसे अपनाकर वजन कंट्रोल, एनर्जी लेवल और मेंटल क्लैरिटी में सुधार महसूस करते हैं।
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