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एक ड्रिंक से थकान दूर करने की आदत बन सकती है गर्भधारण में बाधा

(जीवन दिशा न्यूज़)– रोज़ की थकान और तनाव से राहत पाने के लिए शाम को सिर्फ़ एक ड्रिंक लेना कई लोगों को मामूली लगता है, लेकिन एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन बताता है कि यह छोटी-सी आदत महिलाओं की प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) पर गहरा असर डाल सकती है।

एक बड़े सिस्टेमैटिक रिव्यू और डोज़-रिस्पॉन्स मेटा-एनालिसिस में (जिसमें लगभग 98,657 महिलाओं के डेटा शामिल थे) पाया गया कि महिलाओं में अगर रोज़ाना 12.5 ग्राम से ज़्यादा अल्कोहल (यानी औसतन 1 स्टैंडर्ड ड्रिंक) का सेवन होता है, तो गर्भधारण की संभावना (fecundability) में 23% तक की कमी आ सकती है।

यह अध्ययन, जिसका शीर्षक है “Female alcohol consumption and fecundability: a systematic review and dose-response meta-analysis”, 2017 में प्रकाशित हुआ था। इसमें 19 अलग-अलग अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। नतीजे बताते हैं:

  जो महिलाएं बिल्कुल शराब नहीं पीतीं, उनकी तुलना में हल्की पीने वाली (12.5 ग्राम/दिन से कम) महिलाओं में गर्भ ठहरने की क्षमता 11% कम हो सकती है।

  मॉडरेट-हैवी पीने वाली (12.5 ग्राम/दिन से अधिक) में यह कमी 23% तक पहुंच जाती है।

  हर अतिरिक्त 12.5 ग्राम अल्कोहल (एक ड्रिंक) के साथ fecundability में लगभग 2% की कमी देखी गई।

अल्कोहल कैसे प्रभावित करती है फर्टिलिटी?

विशेषज्ञों के अनुसार, अल्कोहल हार्मोनल बैलेंस बिगाड़ती है। यह कुल एस्ट्रोजन लेवल बढ़ा सकती है, जिससे फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हार्मोन (FSH) दब जाता है और ओव्यूलेशन (अंडोत्सर्ग) प्रभावित होता है।

इसके अलावा:

  गर्भाशय में ब्लड फ्लो कम हो जाता है।

  गर्भाशय की लाइनिंग (endometrium) इम्प्लांटेशन के लिए कम सपोर्टिव बन जाती है।

  शुरुआती प्लेसेंटा डेवलपमेंट में रुकावट आ सकती है, जिससे भ्रूण की ग्रोथ प्रभावित होती है।

डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रजनन स्वास्थ्य के लिए अल्कोहल का कोई भी सुरक्षित स्तर नहीं है। सबसे सुरक्षित विकल्प है शून्य (zero) अल्कोहल। अगर आप गर्भधारण की कोशिश कर रही हैं या भविष्य में प्लान कर रही हैं, तो स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और छोटी-छोटी आदतों पर ध्यान दें।

यह जानकारी वैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित है और महिलाओं के स्वास्थ्य जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण है। अगर आपको फर्टिलिटी से जुड़ी कोई समस्या है, तो डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

(स्रोत: Scientific Reports, 2017 – Fan et al.)

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