(जीवन दिशा न्यूज़)– समाज में अक्सर बच्चा न होने की जिम्मेदारी सिर्फ महिला पर डाल दी जाती है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) पुरुष और महिला दोनों की साझा जिम्मेदारी है। विशेषज्ञों और हालिया अध्ययनों के अनुसार, बांझपन के मामलों में पुरुष कारक भी लगभग उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना महिला कारक।
बांझपन के मामलों में पुरुष कारक की हिस्सेदारी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और CDC जैसे स्रोतों के अनुसार, बांझपन के मामलों में:
• लगभग 30-40% मामलों में समस्या केवल पुरुष से जुड़ी होती है।
• 30-40% मामलों में समस्या महिला से जुड़ी होती है।
• बाकी 20-30% मामलों में दोनों पुरुष और महिला कारक मिलकर योगदान देते हैं।
कुल मिलाकर, करीब 50% बांझपन के मामलों में पुरुष कारक शामिल होता है। यह सिर्फ “महिला की समस्या” नहीं है।
उम्र का प्रभाव: महिलाओं में तेज, पुरुषों में धीमा लेकिन मौजूद
महिलाओं में प्रजनन क्षमता उम्र के साथ तेजी से घटती है। 30 साल के बाद अंडों की गुणवत्ता और संख्या कम होने लगती है, और 35 साल के बाद यह गिरावट काफी तेज हो जाती है। 40 साल के बाद गर्भधारण की संभावना बहुत कम रह जाती है।
पुरुषों में भी उम्र का असर पड़ता है, हालांकि यह धीमा होता है। 40 साल के बाद स्पर्म की गुणवत्ता, गतिशीलता (मोटिलिटी) और संख्या में कमी आ सकती है। अध्ययनों से पता चलता है कि 40 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में गर्भधारण की संभावना 30% तक कम हो सकती है, और स्पर्म की मोटिलिटी में सालाना 0.8% तक की कमी आ सकती है।
जीवनशैली दोनों को समान रूप से प्रभावित करती है
धूम्रपान, शराब का सेवन, तनाव, नींद की कमी, मोटापा और जंक फूड दोनों लिंगों में हार्मोन असंतुलन पैदा करते हैं। ये आदतें पुरुषों में स्पर्म काउंट कम कर सकती हैं और महिलाओं में ओव्यूलेशन को प्रभावित कर सकती हैं।
सामान्य दिखना पर्याप्त नहीं
महिलाओं में नियमित मासिक चक्र होने का मतलब पूरी प्रजनन क्षमता नहीं होती। इसी तरह, पुरुषों में सामान्य शारीरिक बनावट होने पर भी स्पर्म संबंधी समस्या हो सकती है।
प्रमुख चिकित्सकीय कारण
• महिलाओं में: पीसीओएस (PCOS), थायरॉइड असंतुलन, एंडोमेट्रियोसिस आदि।
• पुरुषों में: कम स्पर्म काउंट, वैरिकोसील, हार्मोनल असंतुलन आदि।
विशेषज्ञों की सलाह
समय पर जांच और जागरूकता बहुत महत्वपूर्ण है। शुरुआती टेस्टिंग से समय, तनाव और भावनात्मक परेशानी बच सकती है। बांझपन को दोष देने के बजाय समझदारी अपनाएं। देरी न करें – समय पर डॉक्टर से परामर्श लें।
प्रजनन स्वास्थ्य एक टीम वर्क है, न कि लिंग आधारित मुकाबला। साथ मिलकर इसे बेहतर बनाया जा सकता है।
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