(जीवन दिशा न्यूज़)– आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर तैयार खाने, पैकेट वाले स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक्स और फास्ट फूड पर निर्भर हो जाते हैं। लेकिन ये अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स (UPFs) हमारे लिवर के लिए चुपके से जहर बन रहे हैं। एक ताजा बड़े पैमाने के अध्ययन ने खुलासा किया है कि इन फूड्स का ज्यादा सेवन नॉन-एल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) का खतरा काफी बढ़ा देता है।
इस अध्ययन में लगभग 5 लाख (513,440) लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया। नतीजे चौंकाने वाले हैं – जिन लोगों ने सबसे ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स खाए, उनमें NAFLD का जोखिम सबसे कम खाने वालों की तुलना में 22% ज्यादा पाया गया। यानी हाई UPF इनटेक से लिवर में फैट जमा होने की समस्या बढ़ जाती है।
और भी डरावनी बात यह है कि UPF का सेवन जितना 10% बढ़ता है, NAFLD का खतरा उतना ही 6% बढ़ जाता है। यह डोज-रिस्पॉन्स रिलेशनशिप बताता है कि जितना ज्यादा, उतना नुकसान।
अध्ययन के मुताबिक, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स में मौजूद एडिटिव्स इंसुलिन सिग्नलिंग को बिगाड़ते हैं, इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ाते हैं और NAFLD को बढ़ावा देते हैं। साथ ही ये गट बैक्टीरिया (आंत के अच्छे बैक्टीरिया) को असंतुलित कर देते हैं, जिससे सूजन (inflammation) बढ़ती है और लिवर की हालत और खराब हो जाती है।
दूसरी तरफ, अच्छी खबर यह है कि डाइट में फाइबर और प्रोटीन को बढ़ावा देने से लिवर की सेहत बचाई जा सकती है। डाइटरी फाइबर ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है, एक्स्ट्रा फैट को बाहर निकालता है और लिवर के फैट मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है। प्रोटीन-रिच फूड्स लिवर सेल्स की मरम्मत, एंजाइम प्रोडक्शन और डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करते हैं।
यह अध्ययन “Ultra-processed foods and non-alcoholic fatty liver disease: an updated systematic review and dose-response meta-analysis” नाम से प्रकाशित हुआ है, जिसमें 10 अलग-अलग रिसर्च पेपर्स का मेटा-एनालिसिस किया गया।
एक्सपर्ट्स का कहना है – रोजमर्रा की आदतें लंबे समय में सेहत तय करती हैं। पैकेट वाले खाने की जगह घर का बना, फाइबर से भरपूर (फल, सब्जियां, साबुत अनाज) और प्रोटीन युक्त (दाल, अंडा, दूध, पनीर, नट्स) भोजन चुनें। थोड़ा सा बदलाव भी लिवर को बड़ा फायदा दे सकता है।
तो, अगली बार जब आप स्नैक्स का पैकेट उठाएं, तो सोचिए – यह आपके लिवर के लिए दोस्त है या दुश्मन? समझदारी से चुनें, क्योंकि आपका लिवर आपकी जिंदगी का साइलेंट वर्कर है!
(स्रोत: Frontiers in Nutrition जर्नल, 2025 अध्ययन और संबंधित रिसर्च)
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