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तैराकी सिर्फ शरीर के लिए नहीं, दिमाग के लिए भी है ‘मिरेकल ग्रो’ जैसी

(जीवन दिशा न्यूज़): क्या आप जानते हैं कि रोजाना तैराकी करने से न सिर्फ आपका शरीर फिट रहता है, बल्कि दिमाग भी तेज और स्वस्थ होता है? वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि तैराकी एक ऐसा व्यायाम है जो एरोबिक एक्सरसाइज, पूरे शरीर की मूवमेंट और सांस की रिदमिक प्रक्रिया को जोड़ता है, जिससे ब्रेन हेल्थ में जबरदस्त फायदा होता है।

मानव अध्ययनों में एरोबिक व्यायाम को बेहतर नींद, मूड कंट्रोल और कॉग्निटिव परफॉर्मेंस से जोड़ा गया है। वहीं, जानवरों पर किए गए रिसर्च बताते हैं कि तैराकी से न्यूरोप्लास्टिसिटी (दिमाग की बदलने की क्षमता) और ब्रेन हेल्थ से जुड़े मार्कर्स बढ़ते हैं। खास तौर पर, तैराकी से न्यूरोजेनेसिस यानी नए ब्रेन सेल्स का निर्माण बढ़ता है, और BDNF (Brain-Derived Neurotrophic Factor) नामक प्रोटीन का लेवल बढ़ता है, जो दिमाग के लिए ‘मिरेकल ग्रो’ की तरह काम करता है। यह प्रोटीन मेमोरी, लर्निंग और ब्रेन की लॉन्ग-टर्म हेल्थ को सपोर्ट करता है।

एक महत्वपूर्ण अध्ययन (NCBI PMC4296841) में पाया गया कि वयस्क चूहों में 8 हफ्ते तक नियमित तैराकी करने से सबवेंट्रिकुलर जोन (SVZ) में नए नर्व सेल्स की संख्या काफी बढ़ गई। साथ ही, NGF और सिनैप्सिन I जैसे प्रोटीन के लेवल भी बढ़े, जो न्यूरॉन्स की सर्वाइवल और मेंटेनेंस में मदद करते हैं।

दूसरे रिसर्च (NCBI PMC7558513) से पता चला कि तैराकी से तनाव और एंग्जायटी जैसी व्यवहार कम होते हैं, और कॉर्टिकोस्टेरोन (स्ट्रेस हॉर्मोन) के लेवल पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। इससे मूड बेहतर होता है और दिमाग पर स्ट्रेस का नुकसान कम होता है।

स्टैनफोर्ड लाइफस्टाइल मेडिसिन के अनुसार, एक्सरसाइज से BDNF, VEGF जैसे ग्रोथ फैक्टर्स बढ़ते हैं, जो न्यूरोप्लास्टिसिटी और ब्रेन में नए ब्लड वेसल्स के निर्माण को बढ़ावा देते हैं। इससे कॉग्निटिव हेल्थ लंबे समय तक बनी रहती है और उम्र बढ़ने के साथ होने वाली याददाश्त की कमजोरी को रोका जा सकता है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि तैराकी में कुछ भी जादुई नहीं है – बस नियमित रूप से इसे अपनाने से दिमाग को सबसे बेहतर तरीके से सपोर्ट मिलता है। अगर आप रोजाना थोड़ा समय तैराकी के लिए निकालें, तो यह आपके ब्रेन के लिए सबसे कंसिस्टेंट और प्रभावी तरीका हो सकता है।

तो आज से ही पूल में कूदिए और अपने दिमाग को भी ‘फिट’ रखिए। 🏊‍♂️🧠

(स्रोत: NCBI अध्ययन PMC4296841, PMC7558513 और स्टैनफोर्ड लाइफस्टाइल मेडिसिन रिसर्च)

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