(जीवन दिशा न्यूज़):डॉ. अंशुमान कौशल MD FACS एक अनुभवी सर्जन हैं जो मोटापा, डायबिटीज, PCOS और पोस्ट-बेरिएट्रिक सर्जरी वाले मरीजों का इलाज करते हैं। उन्होंने साफ किया है कि यह सामान्य शैक्षिक सामग्री है, व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह नहीं।
मशहूर बेरिएट्रिक और लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. अंशुमान कौशल (theangry_doc) चाय प्रेमियों को एक महत्वपूर्ण संदेश दे रहे हैं। डॉक्टर साफ-साफ कहते हैं कि “चाय villain नहीं है, बल्कि उसके साथ खाए जाने वाले बिस्किट ही असली अपराधी हैं”।
डॉक्टर बताते हैं कि कई लोग रोजाना “सिर्फ 2 बिस्किट” कहकर शुरू करते हैं, जो धीरे-धीरे 6 बिस्किट, दिन में दो बार हो जाता है। ये कमर्शियल बिस्किट एक “परफेक्ट मेटाबॉलिक पैकेज” होते हैं – रिफाइंड आटा, शुगर, फैट, नमक, कम फाइबर और कम प्रोटीन से भरे हुए। इससे शरीर में तेजी से कैलोरी बढ़ती है, लेकिन भूख नहीं मिटती। नतीजा? ब्लड शुगर में स्पाइक, बार-बार भूख लगना और पेट की चर्बी का बढ़ना।
बिस्किट क्यों हैं खतरनाक?
डॉ. कौशल के अनुसार:
• रिफाइंड कार्ब्स और शुगर: ये तेजी से ब्लड ग्लूकोज बढ़ाते हैं और इंसुलिन स्पाइक का कारण बनते हैं।
• ट्रांस फैट और सॉल्ट: लंबे समय तक इस्तेमाल से मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और फैटी लीवर की समस्या हो सकती है।
• कम फाइबर-प्रोटीन: इससे पेट जल्दी खाली महसूस होता है और लोग ज्यादा खाने लगते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिश है कि फ्री शुगर को रोजाना की कुल कैलोरी का 10% से कम रखा जाए, आदर्श रूप से 5% से भी नीचे। भारत के ICMR-NIN 2024 गाइडलाइंस भी हाई फैट, हाई शुगर, हाई सॉल्ट और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स को सीमित करने की सलाह देते हैं।
डॉक्टर मजेदार अंदाज में कहते हैं, “चाय इमोशनल है, लेकिन बिस्किट मैथमेटिकल है”। यानी चाय का आनंद लें, लेकिन बिस्किट को रोजाना की आदत न बनने दें।
लेख क्यों गया वायरल?
इस लेख को हजारों लोगों ने पसंद किया है। कमेंट्स में लोग अपनी कहानियां शेयर कर रहे हैं – कुछ कह रहे हैं कि उन्होंने बिस्किट छोड़ दिए और वजन कंट्रोल हुआ, तो कुछ पूछ रहे हैं कि रस्क या टोस्ट का क्या विकल्प हो सकता है। एक यूजर ने तो यहां तक कहा कि “बिस्किट सिगरेट से भी ज्यादा नुकसानदायक हो सकते हैं”।
विशेषज्ञों की राय
पोषण विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स (जैसे पैकेट वाले बिस्किट) न सिर्फ वजन बढ़ाते हैं बल्कि मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचाते हैं। इसके बजाय स्वस्थ विकल्पों की सलाह दी जा रही है:
• मखाना या रोस्टेड चना चाय के साथ।
• ओट्स बिस्किट या घर पर बने बेसन के लड्डू (कम शुगर वाले)।
• फल जैसे केला या सेब के स्लाइस।
• नट्स (मुट्ठी भर बादाम या अखरोट)।
क्या करें?
1. चाय का मजा लें, लेकिन बिस्किट की मात्रा सीमित रखें।
2. अगर रोजाना 4-6 बिस्किट खाने की आदत है तो धीरे-धीरे कम करें।
3. वजन, ब्लड शुगर या लीवर की समस्या हो तो डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह जरूर लें।
यह लेख हमें याद दिलाता है कि छोटी-छोटी आदतें ही बड़े स्वास्थ्य मुद्दों की वजह बनती हैं। चाय पीने वालों के लिए यह एक आंख खोलने वाला संदेश है। अगर आप भी चाय-बिस्किट के शौकीन हैं तो आज से ही अपनी आदत पर नजर डालिए।
नोट: स्वास्थ्य संबंधी किसी भी बदलाव से पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।
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