कानूनी इत्तिआन: पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करने के लिए तैयार रहें – भारत का नया आपराधिक कानून FIR प्रक्रिया में बदलाव लाता है

(जीवन दिशा) नई दिल्ली, : हर शिकायत FIR में नहीं बदलती। पुलिस हर शिकायत को गंभीरता के आधार पर वर्गीकृत करती है। आइए जानते हैं नई आपराधिक प्रणाली के तहत क्या बदलाव आए हैं:

संज्ञेय अपराध (Cognizable Offences):

  ये गंभीर अपराध हैं जैसे हत्या, बलात्कार, डकैती, जो भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अनुसूचि 1 में सूचीबद्ध हैं।

  पुलिस को तुरंत FIR दर्ज करनी होगी। मजिस्ट्रेट की अनुमति की जरूरत नहीं – गिरफ्तारी और जांच तुरंत शुरू हो सकती है।

असंज्ञेय अपराध (Non-Cognizable Offences):

  ये मामूली अपराध हैं जैसे मौखिक गाली-गलौज, मामूली चोट, या धमकी।

  पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की मंजूरी के जांच नहीं कर सकती। आपको सीधे मजिस्ट्रेट से संपर्क करना होगा।

अगर पुलिस FIR दर्ज करने से मना करे:

  लिखित शिकायत जमा करें और उसकी पावती लें।

  उच्च अधिकारियों (SP/DCP) से संपर्क करें, धारा 154(3) CrPC के तहत।

  लिखित मना करने की मांग करें – इससे आप अपने मामले को कानूनी रूप से बढ़ा सकते हैं।

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