(जीवन दिशा न्यूज़): एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि लंबे समय तक हल्की ठंड के संपर्क में रहने से मानव शरीर का मेटाबॉलिज्म, ब्राउन फैट की गतिविधि और इंसुलिन संवेदनशीलता पर गहरा असर पड़ता है। यह अध्ययन जर्नल डायबिटीज में प्रकाशित हुआ है, जिसमें शोधकर्ताओं ने चरम ठंड या लैब में छोटी अवधि की ठंड के बजाय वास्तविक जीवन जैसा अपनाया।
शोध में प्रतिभागियों को एक महीने तक 19°C (लगभग 66°F) के तापमान वाले कमरे में सोने के लिए रखा गया। इसके बाद मेटाबॉलिक चैंबर्स, PET/CT इमेजिंग और हार्मोन एनालिसिस से उनकी जांच की गई। इस तरीके से शोधकर्ता सिर्फ पर्यावरणीय तापमान के असर को अलग करके देख सके।
मुख्य निष्कर्ष:
• मेटाबॉलिक सुधार बिना वजन घटे, डाइट बदलाव या ज्यादा व्यायाम के हुए।
• ठंड के संपर्क से ब्राउन एडिपोज टिश्यू (ब्राउन फैट) का विस्तार हुआ और एडिपोज सिग्नलिंग में बदलाव आया।
• एडिपोनेक्टिन हार्मोन बढ़ा, जबकि लेप्टिन जैसे दो हार्मोन कम हुए – ये फैट ऑक्सीडेशन और मेटाबॉलिक लचीलापन से जुड़े हैं।
• भोजन के बाद इंसुलिन संवेदनशीलता बेहतर हुई, यानी पोषक तत्वों को कम इंसुलिन से ही शरीर ने साफ किया। इससे ईंधन का उपयोग बेहतर होता है और स्टोरेज कम।
शोधकर्ताओं का कहना है कि मेटाबॉलिज्म स्थिर नहीं है – यह पर्यावरणीय बदलावों के साथ ढलता है। हल्की ठंड सीधे फैट लॉस नहीं कराती, लेकिन शरीर की ऊर्जा उपयोग प्रोफाइल को ज्यादा कुशल और लचीला बनाती है। लंबे समय में सही पोषण और ट्रेनिंग के साथ यह बॉडी कंपोजिशन, इंसुलिन हेल्थ और एनर्जी बैलेंस पर सकारात्मक असर डाल सकती है।
यह अध्ययन मोटापा और डायबिटीज जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए नई उम्मीद जगाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि घर में थर्मोस्टेट को थोड़ा कम रखना या हल्की ठंड में समय बिताना रोजमर्रा की जिंदगी में मेटाबॉलिक हेल्थ सुधारने का आसान तरीका हो सकता है।
(स्रोत: जर्नल डायबिटीज में प्रकाशित अध्ययन)
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