(जीवन दिशा न्यूज़) नई दिल्ली, शहर के प्रसिद्ध सांस्कृतिक सभागार में रविवार शाम को आयोजित “श्रद्धांजलि भजन संध्या” में सैकड़ों की संख्या में पहुंचे परिजनों, मित्रों, शुभचिंतकों और समाजसेवियों ने दिवंगत श्री सुभाष गुप्ता जी को आंसुओं भरी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह आयोजन स्व. सुभाष गुप्ता जी की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके पुत्र-पुत्रवधू एवं परिवारजन द्वारा आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप-प्रज्वलन और स्व. गुप्ता जी के चित्र पर पुष्पांजलि से हुआ। इसके बाद प्रसिद्ध भजन गायकों ने “इतनी शक्ति हमें देना दाता”, “रघुपति राघव राजा राम”, “हे गोविंद हे गोपाल” जैसे एक से बढ़कर एक भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति दी, जिन्हें सुनकर सभागार में उपस्थित हर आंख नम हो गई। भजनों के बीच-बीच में स्व. सुभाष गुप्ता जी के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को याद किया गया, जिससे पूरा वातावरण श्रद्धा और करुणा से सराबोर हो उठा।
एक जीवन जो सेवा का पर्याय बन गया
स्व. सुभाष गुप्ता जी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपने अथक परिश्रम, संघर्ष और समर्पण से न केवल स्वयं को ऊंचाइयों पर पहुंचाया, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के लिए जीवनभर खड़े रहे। शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीब कन्या विवाह, अनाथालय संचालन, रक्तदान शिविर जैसे असंख्य सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रिय भूमिका रही। लोग उन्हें “सेवा का जीता-जागता मूर्तिमान रूप” कहकर पुकारते थे।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि उन्होंने कभी भी अपनी सेवा को प्रचार का माध्यम नहीं बनाया। हमेशा चुपचाप, बिना शोर-शराबे के जरूरतमंदों की मदद करते थे। उनके जीवन का मूल मंत्र था – “सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है”। त्याग, तप और तपस्या का जो अद्वितीय संगम उनके जीवन में दिखाई देता था, उसे देखकर आज भी युवा पीढ़ी प्रेरणा लेती है।
परिवार ने लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में स्व. सुभाष गुप्ता जी के सुपुत्र श्री अनुज गुप्ता ने सभी आगंतुकों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा,
“पिताजी ने हमें जो संस्कार दिए हैं, उन्हें हम कभी भूल नहीं सकते। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम सब संकल्प लेते हैं कि उनकी सेवा भावना, सरल जीवन और सामाजिक समर्पण की ज्योति को हम आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाते रहेंगे।”
उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से अपील की कि समाज में जब भी कोई जरूरतमंद दिखे, उसे पिताजी की स्मृति में थोड़ी सी मदद अवश्य करें। यह सुनकर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
शहर भर से पहुंचे लोग
भजन संध्या में शहर के गणमान्य नागरिक, विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, राजनेता, व्यापारी वर्ग और आमजन बड़ी संख्या में शामिल हुए। कई लोगों ने व्यक्तिगत रूप से स्व. गुप्ता जी द्वारा की गई मदद के संस्मरण सुनाए, जिससे यह साफ हो गया कि उनका जाना समाज के लिए कितनी बड़ी क्षति है।
कार्यक्रम का समापन “ओम जय जगदीश हरे” की सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। बाहर निकलते समय हर व्यक्ति के चेहरे पर एक ही भाव था – “ऐसे महापुरुष अमर रहते हैं, वे कभी मरते नहीं।”
स्व. श्री सुभाष गुप्ता जी को कोटि-कोटि नमन।
उनका जीवन हम सबके लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत बना रहेगा।
ॐ शांति ॐ 🙏🏻
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