(जीवन दिशा) हाल के दिनों में आवारा कुत्तों द्वारा काटने की घटनाओं में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। लोगों में डर का माहौल है, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर जिम्मेदारी किसकी है? इस मुद्दे पर कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर नजर डालते हैं।
बीएनएस सेक्शन 291 के तहत सजा का प्रावधान
नए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) सेक्शन 291 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानवर के जरिए किसी अन्य को नुकसान पहुँचाता है, तो उसे 6 महीने तक की जेल या 5,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है। यह कानून पीड़ितों के लिए राहत का सबब हो सकता है, लेकिन लागू करना एक चुनौती बना हुआ है।
म्युनिसिपल अथॉरिटी की जिम्मेदारी
आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके प्रबंधन की जिम्मेदारी म्युनिसिपल अथॉरिटीज पर आती है। एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, 2023 के तहत नगरीय निकायों को नसबंदी, टीकाकरण और पुनर्वास के लिए एक पूर्ण प्रणाली बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, कई जगहों पर इस नियम का पालन पूरी तरह से नहीं हो पा रहा है।
आरडब्ल्यूए और सोसाइटीज की भूमिका
दूसरी ओर, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) और सोसाइटीज के मैनेजमेंट पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि सोसाइटी में फीडिंग जोन, जागरूकता और शिकायत प्रतिक्रिया प्रणाली नहीं है, तो कानूनी जवाबदेही बन सकती है। कई मामलों में सोसाइटीज की लापरवाही के कारण स्थिति और बिगड़ती जा रही है।
कुत्ता काटने की स्थिति में क्या करें?
यदि कोई कुत्ता काट ले, तो निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
• एफआईआर दर्ज कराएं
• मेडिकल रिपोर्ट प्राप्त करें
• सीसीटीवी फुटेज इकट्ठा करें
• म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से शिकायत दर्ज करें
पशु कल्याण और सार्वजनिक सुरक्षा का संतुलन
इस मुद्दे पर पशु कल्याण और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। सरकार और स्थानीय निकायों को मिलकर एक प्रभावी योजना बनानी होगी, जिसमें न केवल कुत्तों की देखभाल हो, बल्कि लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।
क्या म्युनिसिपल अथॉरिटीज और सोसाइटीज अपनी जिम्मेदारी निभा पाएंगी, या यह समस्या और गंभीर होती जाएगी? यह सवाल अब हर नागरिक के मन में है।
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