मैं आचार्य शंकर के चरणों में कोटि-कोटि नमन करता हूं- शिवराज सिंह चौहान

(जीवन दिशा न्यूज़) केरल की भूमि अत्यंत पवित्र है। इस धरती ने सनातन को आदि शंकराचार्य जी जैसा नायक दिया, जिसने सांस्कृतिक, आध्यात्मिक तथा भौगोलिक स्तरों पर सार्वभौमिक एकात्मता का सूत्रपात किया।

मैं आचार्य शंकर की ज्ञानभूमि और गुरुभूमि मध्यप्रदेश से उनकी जन्मभूमि कालड़ी आया हूं। यहां की दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा आत्मा को और उज्ज्वल कर रही है।

मध्यप्रदेश से आचार्य शंकर का गहरा नाता रहा है। यहां उन्हें गुरु मिले, नर्मदा किनारे कई स्त्रोतों की उन्होंने रचना की और यहीं से उन्होंने विश्व को एकात्मता का संदेश देने के लिए अपनी दिग्विजय यात्रा प्रारंभ की।

एक बार पुनः भगवत्पाद आद्य श्री शंकराचार्य जी की ज्ञानभूमि ओंकारेश्वर से एकात्मता का सार्वभौमिक संदेश संपूर्ण विश्व को नई दिशा दे रहा है। यहां विनिर्मित ‘एकात्म धाम’ प्रकल्प तथा ‘अद्वैत लोक’ प्रस्थानत्रयी, सनातन संस्कृति, आर्षविद्या व वैदिक स्वर्णिम सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार का वैश्विक केंद्र बन रहा है।

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