(जीवन दिशा न्यूज़) पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) ने आज नई दिल्ली में पहली ‘ब्लू टॉक्स’ बैठक का आयोजन किया । इस बैठक में फ्रांस के दूतावास और भारत में कोस्टा रिका के दूतावास की सह-भागीदारी थी। सरकारी, शिक्षा जगत और अनुसंधान संस्थानों के 50 से अधिक प्रतिभागियों ने ‘महासागर स्वास्थ्य और शासन’ से संबंधित मामलों पर व्यक्तिगत रूप से इस उच्च स्तरीय विचार-विमर्श को देखा।

इस बैठक की सह-अध्यक्षता पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन के साथ भारत में फ्रांस के राजदूत श्री थिएरी माथौ और कोस्टा रिका चार्जी डी’एफ़ेयर, सुश्री सोफिया सालास मोंगे ने संयुक्त रूप से की।
यह बैठक 7-8 जून, 2024 को सैन जोस, कोस्टा रिका में होने वाले आगामी महासागर क्रिया पर उच्च-स्तरीय कार्यक्रम (हाई-लेवल इवेंट ऑन ओशन एक्शन-एचएलईओए) कार्यक्रम ‘इमर्स्ड इन चेंज’ का अग्रदूत है। बड़े परिप्रेक्ष्य में, ‘ एचएलईओए ‘ आगामी संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन (युनाइटेड नेशंस ओसियन कांफ्रेंस – यूएनसीओ3) के लिए सिफारिशें और दृष्टिकोण एकत्र करने के लिए एक पूर्ववर्ती कार्यक्रम (प्रीकर्सर) है।

पहली ब्लू टॉक्स बैठक का मुख्य उद्देश्य : i) महासागर के प्रशासन और स्वास्थ्य से संबंधित विषयों पर अच्छी प्रथाओं और सफल अनुभवों का आदान-प्रदान करना, ii) सरकारी और गैर-सरकारी दोनों तरह के विभिन्न हितधारकों से सिफारिशें और इनपुट प्राप्त करना iii) यूएनओसी3 की तैयारी को प्रतिबिंबित करते हुए और उसमें आवश्यक जानकारी शामिल करना तथा iv) समुद्र के स्वास्थ्य पर चिंताओं को दूर करने के लिए विशिष्ट कार्यान्वयन कार्यों की तलाश करना था ।
2 घंटे की बैठक में तीन खंड शामिल थे। पहले सत्र में कोस्टारिका के दूतावास ने आगामी ‘एचएलईओए’ कार्यक्रम के उद्देश्य पर एक फिल्म का प्रदर्शन किया। दूसरे सत्र में विभिन्न विषयों पर तीन तकनीकी वार्ताएं शामिल थीं, इसके बाद महासागर मामलों पर खुली चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। अंतिम समापन सत्र में भविष्य के महासागर कार्यक्रम के लिए प्रमुख सिफारिशों और आगे बढ़ने के तरीके का सारांश दिया गया I
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यह बैठक यूएनसीओ3 2025 के संदर्भ में भारत की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने के लिए एक सफल मंच सिद्ध हुई है। भारत अपने कार्यक्रमों और नीतियों को वैश्विक प्रतिबद्धता के साथ संरेखित करके महासागर विज्ञान और समुद्री विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है ताकि स्थायी आधार पर समुद्री संसाधनों के दोहन को सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय भारत को 2025 में नीस में आगामी महासागर सम्मेलन के लिए एक प्रमुख भागीदार के रूप में मान्यता दी गई है। भारत को इस महत्वपूर्ण वैश्विक आयोजन की तैयारी के लिए फ्रांस और कोस्टा रिका के साथ घनिष्ठ सहयोग मिलने की आशा है।

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