(जीवन दिशा न्यूज़) एनसीआईबी (NGO) द्वारा बताया गया है कि अगर कोई कंपनी/ नियोक्ता या ठेकेदार किसी कर्मचारी या क्षर्मिक की सैलरी/ पारिश्रमिक रोक लेती है या सैलरी देने से मना कर देती है तो इसकी शिकायत की जा सकती है। अगर कर्मचारी ने काम किया है तो उसे तय सैलरी हासिल करने का अधिकार है। अगर कंपनी सैलरी नहीं देती है तो सबसे पहले लिखित शिकायत क्षेत्रीय पुलिस को करना चाहिए। अगर पुलिस आपके शिकायत को गंभीरता से ले तो आपका काम आसान हो सकता हैं। पुलिस द्वारा कोई सकारात्मक कार्यवाही न करने पर कर्मचारी राज्य सरकार के लेबर कोर्ट या जिला कोर्ट में सीधे शिकायत कर सकता है।
इसके लिए आपको अपने मुख्य नियोक्ता (Principal Employer) को लिखित शिकायत देना है। जिसमें आप अपने ठेकेदार का पूरा नाम, पता, काम का स्थान के साथ अपना पूरा नाम, पता, फोन नंबर, एम्प्लोयी आईडी, बकाया राशि आदि का उल्लेख करना है। आप अपने शिकायत में यह जरूर लिखें कि आपने कब से कब तक किस स्थान/प्रोजेक्ट के लिए काम किया है। अगर हो सके तो आप अपना कम्पनी/ ठेकदार द्वारा दिया आईकार्ड आदि का फोटोकॉपी हो तो लगा दें।
आपके मुख्य नियोक्ता के पास शिकायत के 7 से 15 दिन के अंदर आपके पैसे का भुगतान नहीं किया जाए। ऐसे में आप अपने एरिया के सम्बन्धित लेबर कमिश्नर ऑफिस में लिखित शिकायत करेंगे। जिसके बाद लेबर कमिश्नर ही क़ानूनी कार्रवाई कर आपके पैसे का भुगतान करवा सकते हैं। आपको लेबर कमिश्नर ऑफिस में शिकायत करते समय ध्यान रखने वाली मुख्य बातें-
• आपको अपने सम्बन्धित सरकार (राज्य सरकार/केंद्र सरकार) के लेबर कमिश्नर ऑफिस में ही शिकायत करना है।
• अगर आप राज्य सरकार के किसी विभाग, किसी प्राइवेट कम्पनी के अंतर्गत हैं तो राज्य सरकार के लेबर कमिश्रर ऑफिस में शिकायत करें।
• अगर आप रेलवे, पोस्ट ऑफिस, आईआरसीटीसी, एयरपोर्ट, सीबीएससी, एसएफआई, कोल, आदि में कार्यरत हैं तो केंद्र सरकार के रीजिनल लेबर कमिश्रर ऑफिस में शिकायत करेंगे।
• अपने शिकायत में मुख्य नियोक्ता को पार्टी नंबर 1 बनाए और उनको भेजे शिकायत पत्र का जिक्र करते हुए फोटो कॉपी संलग्न करें।
ध्यान रहें कि, अगर आपको लेबर कमिश्रर ऑफिस द्वारा प्राप्ति नहीं दिया जाए तो आपने शिकायत का कॉपी रजिस्टर्ड पोस्ट/स्पीड पोस्ट से जरूर भेजें। आप जैसे ही लेबर कमिश्नर ऑफिस में लिखित शिकायत करेंगे। उसके कुछ ही दिन बाद 30 दिनों के अंदर आपको और आपके ठेकेदार और मुख्य नियोक्ता को नोटिस देकर बुलाया जायेगा। जिसके बाद आपके शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आपका पैसा दिलवाया जायेगा। जिसके लिए आपसे कोई भी फ़ीस नहीं लिया जायेगा।
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